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Wednesday, 4 August 2021

फिर निकलीं

फिर निकलीं
पतझर को भूल
नई कोंपलें
-मीनू खरे
(जुगनुओं की वसीयत)

Friday, 8 May 2015

युग-युग से

युग-युग से
छलनी हुआ सीना
अडिग रहा

-कैलाश कल्ला
[फेसबुक हाइकु समूह से]

Sunday, 9 March 2014

बाँटे सुगंध

बाँटे सुगंध
फूलों से लूटकर
विद्रोही हवा

-सुनीता अग्रवाल
[फेसबुक से हाइकु समूह से]