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Thursday, 5 August 2021

जाड़ा शैतान

जाड़ा शैतान,
जा घुसा रजाई में
दादा के साथ।

-अमित खरे

Wednesday, 30 May 2018

शीत धुनकी

शीत धुनकी
फैलाती धरा पर
पाले की रुई

-पुष्पा मेहरा

Thursday, 24 April 2014

रानी सरदी

रानी सरदी
बाँट रही दुशाले
धूप से बुने

-डा० उर्मिला अग्रवाल
[भोर आसपास है, हाइकु संग्रह से]

Wednesday, 22 January 2014

रुई की मिल

रुई की मिल
खुल गई नभ में
बौराई ठण्ड

-शोभा रस्तोगी
[ ईमेल से प्राप्त ]

Sunday, 12 January 2014

मुँडेर पर

मुँडेर पर
काँप रही गौरेया
सूरज गुम

-अश्विनी कुमार विष्णु
[फेसबुक हाइकु समूह से]

Saturday, 14 December 2013

बूढ़ी हड्डियाँ

बूढ़ी हड्डियाँ
सहलाने आ गयी 
जाड़े की धूप

-सुनीता अग्रवाल
[फेसबुक हाइकु समूह से]

Friday, 4 October 2013

ले गया छीन

ले गया छीन
शिशिर महाजन
सूर्य का धन

-डा० रामसनेहीलाल शर्मा यायावर
[काँधे पै घर, हाइकु संग्रह से साभार] 

Thursday, 20 December 2012

कँपकँपाते


कँपकँपाते
जमते सर्द दिन
 अलाव ढूँढ़ें

-डा० सरस्वती माथुर
[फेसबुक से साभार]