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Thursday, 5 August 2021

हया ही तो है

हया ही तो है 
सिमटी छुईमुई 
छूते ही देह !

-आभा खरे

हूँ नवांकुर

हूंँ नवांकुर
दरख्तों से सीखता
आसमां छूना 

-केशव यादव

Saturday, 22 March 2014

हरा-भरा था

हरा-भरा था
मर गया शहर
धूल-धुएँ से

-वीरेन्द्र आज़म
[फेसबुक हाइकु समूह से]

Sunday, 29 September 2013

हाँ झील हूँ मैं

हाँ झील हूँ मैं
तटों के हैं पहरे
उन्मुक्त नहीं

-आभा खरे
[फेसबुक हाइकु समूह से]