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Monday, 21 July 2014

लाया अरुण

लाया अरुण
तम को हराकर
भोर की ट्राफी

-अभिषेक जैन
[फेसबुक हाइकु समूह से]

Sunday, 26 January 2014

ले चली हवा

ले चली हवा
फूलों की पिटारी से
सोंधी सी गंध

-डा० मनोहर अभय
[हाइकु दर्पण 08 से]

Friday, 4 October 2013

ले गया छीन

ले गया छीन
शिशिर महाजन
सूर्य का धन

-डा० रामसनेहीलाल शर्मा यायावर
[काँधे पै घर, हाइकु संग्रह से साभार] 

Wednesday, 18 September 2013

लड़े जा रही

लड़े जा रही
अपने ही बिंब से
मूर्ख चिड़िया

-डा॰ सुरेन्द्र वर्मा
["धूप कुन्दन" हाइकु संग्र्ह से]

Thursday, 29 August 2013

लूट ले गया

लूट ले गया
धूप के सारे रंग
इन्द्रधनुष

-राजीव गोयल
[फेसबुक हाइकु समूह से]

Monday, 15 April 2013

लम्बा था कश


लम्बा था कश
मस्ती में धुआं पूछे
किसे जलाया ।

-अरुण सिंह रुहेला
फेसबुक से साभार

Wednesday, 13 June 2012

लेटी है घाटी


लेटी है घाटी
लाचार एक नारी
पर्वत तले


-डा० शैल रस्तोगी

[ "सन्नाटा खिंचे दिन" हाइकु संग्रह से साभार ]

Tuesday, 12 June 2012

लेटी थी धूप


लेटी थी धूप
सागर तट पर
प्यास बुझाने


-डा० भावना कुँअर
हाइकु 2009 से साभार

Sunday, 3 June 2012

ले पिचकारी


ले पिचकारी
प्रकृति ने रॅंग दीं
तितलीं सारी।

-सन्तोष कुमार सिंह

Wednesday, 23 May 2012

लौटें गोधन


लौटें गोधन
अपने खूँटे पर
साँझ की बेला।

-शशिकान्त गीते

Saturday, 10 September 2011

लाई पवन

लाई पवन
सोंधी मिट्टी की बास
तू आसपास ।


  - सत्यानन्द जावा

Sunday, 4 September 2011

लटक रहा

लटक रहा
आयु की खूँटी पर
साँस का कुर्ता ।


-सत्यानन्द जावा
( हाइकु पत्र - 5, मई०- 1979 से )

Tuesday, 19 July 2011

लिखते पेड़

लिखते पेड़
हरियाले कागज
प्रेम की पाती ।


-डा० सुधा गुप्ता
('चुलबुली रात ने' हाइकु संग्रह से)