Showing posts with label ध. Show all posts
Showing posts with label ध. Show all posts

Saturday, 6 December 2014

धकेल दिया

धकेल दिया
पंख निकलते ही
माँ ने नीड़ से

-एस.डी. तिवारी
[हाइकु समूह से]

Saturday, 11 January 2014

धुंध समेट

धुंध समेट
पल्लू में बाँध लायी
धूप दुल्हिन

-आभा खरे
[फेसबुक हाइकु समूह से]

Tuesday, 25 September 2012

धूप बीनती


धूप बीनती
मृदुल दूब पर
बिखरे मोती


-डा० मिथिलेश दीक्षित

Wednesday, 13 June 2012

धूप सोई है


धूप सोई है
मेघों की रजाई में
छिपा है सूर्य


-डा० शैल रस्तोगी

[ "सन्नाटा खिंचे दिन" हाइकु संग्रह से साभार ]

Thursday, 31 May 2012

धूप हिरनी


धूप हिरनी
पर्वत की घाटी में
कुलाँचें भरे ।

-डा० राजकुमारी शर्मा राज

Friday, 6 April 2012

धवल मेघ

धवल मेघ
नीले आसमान में
रुई के फाहे।

-सुरेश कुमार

Sunday, 18 September 2011

धन्य है वर्षा

धन्य है वर्षा
खेतों में कविताएँ
बोते किसान ।


-डा० भगवतशरण अग्रवाल

Tuesday, 19 July 2011

धूप हिरनी

धूप हिरनी
पर्वत की घाटी में
कुलाँचें भरे ।

-डा० राजकुमारी शर्मा राज