हाइकु कोश *वर्ण*
हाइकु कोश वर्ण क्रमानुसार
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हाइकु कोश
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Friday, 10 January 2020
माँ को चुराते
माँ को चुराते
थोड़ा-थोड़ा करके
बच्चे उसके
-अनिता कपूर
(दर्पण के सवाल)
Friday, 8 February 2019
मात खा गया
मात खा गया
झूठे जग के आगे
बेचारा सच
-डा० उर्मिला अग्रवाल
(उजाले की खातिर से)
Thursday, 30 June 2016
मेघ ने खोले
मेघ ने खोले
बूंदों के पैराशूट
उतरे ओले
-अभिषेक जैन
Sunday, 1 March 2015
मक्के की रोटी
मक्के की रोटी
खेतों की ओर चली
चुन्नी में बाँध
-ऋता शेखर मधु
[फेसबुक हाइकु समूह से]
Wednesday, 10 December 2014
मेट्रो की भीड़
मेट्रो की भीड़
भाग रहे हैं लोग
सभी अकेले
-प्रियम्बरा
Sunday, 12 January 2014
मुँडेर पर
मुँडेर पर
काँप रही गौरेया
सूरज गुम
-अश्विनी कुमार विष्णु
[फेसबुक हाइकु समूह से]
Saturday, 27 July 2013
मेरा लेखन
मेरा लेखन
देख काँपता पेड़
सोचे, कटूँगा
-रामनिवास बांयला
[फेसबुक केन्द्रीय विद्यालय समूह से]
Thursday, 20 December 2012
मृत जो हुयीं
मृत जो हुयीं
संवेदनायें मेरी
मैं जीती गयी
-सुनीता अग्रवाल
[फेसबुक से साभार]
Saturday, 25 August 2012
मेरा बयान
मेरा बयान
भरी अदालत में
गूँजती चीख
-हरेराम समीप
Wednesday, 13 June 2012
मेघ बरसे
मेघ बरसे
नीड़ से न निकली
चिड़ी भोर की
-डा० शैल रस्तोगी
[ "सन्नाटा खिंचे दिन" हाइकु संग्रह से साभार ]
Sunday, 3 June 2012
मिट्टी का घड़ा
मिट्टी का घड़ा
तप कर ही देता
शीतल जल ।
-हरेराम समीप
Saturday, 2 June 2012
मैं न पहुँचा
मैं न पहुँचा
मिट्टी हो गए पिता
राह देखते ।
-ओम प्रकाश यती
Friday, 6 April 2012
माँ है गाँव में
माँ है गाँव में
बेटा है शहर में
रिश्ता फोन में ।
-आर.पी.शुक्ल
Saturday, 14 January 2012
माघ महीना
माघ महीना
हिम ढके शिखर
शिव फिर हँसे ।
-कमला रत्नम
(हाइकु पत्र 21, दिसम्बर -1983 से साभार)
Sunday, 18 September 2011
मस्ती होली की
मस्ती होली की
भू पे उतरे
,
फिरे
इन्द्रधनु भी ।
-सत्यपाल चुघ
(
हाइकु पत्र
- 16,
मार्च
1982 )
Sunday, 4 September 2011
मासिक वेतन
मासिक वेतन
एक बूँद पानी की
गर्म रेत में।
-रामकृष्ण विकलेश
(
हाइकु पत्र
-17,
मई
-1982
से
)
मेघ रीतते
मेघ रीतते
इसीलिए भरते
वे फिर फिर ।
-डा० सुरेन्द्र वर्मा
(
हाइकु दर्पण
,
अंक
-8
से
)
Wednesday, 24 August 2011
मर जाएंगे
मर जाएंगे
हरियाली मरी तो
हम सब भी ।
-कमलेश भट्ट कमल
Tuesday, 19 July 2011
माघ बेचारा
माघ बेचारा
कोहरे की गठरी
उठाए फिरे ।
-डा० सुधा गुप्ता
('धूप से गप-शप' हाइकु संग्रह से)
Tuesday, 12 July 2011
मेघ मुट्ठी में
मेघ मुट्ठी में
कैद चाँद, फिसला
निकल भागा ।
- डा० सुधा गुप्ता
( " चुलबुली रात ने " हाइकु संग्रह से )
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