Showing posts with label फ. Show all posts
Showing posts with label फ. Show all posts

Thursday, 9 January 2014

फलाँग जाती

फलाँग जाती
पर घेर देती है
मुझको, साड़ी

-अजन्ता
[फेसबुक हाइकु समूह से]

Tuesday, 11 June 2013

फूले पलाश


फूले पलाश
गुलमोहर खिले
जले बैसाख

-दुर्गेश रस्तोगी
[उर्वरा से साभार]

Monday, 10 June 2013

फूले पलाश


फूले पलाश
जंगल में दहकी
रंगों की आग

-शैल सक्सेना

Tuesday, 23 April 2013

फिर खिलूँगी


फिर खिलूँगी
बीज हूँ जीवन का
अँखुआने दो

-डा० सरस्वती माथुर

Wednesday, 23 January 2013

फूले पलाश


फूले पलाश
सिन्दूरी वसन में
जोगन धरा

-योगेन्द्र वर्मा
[ फेसबुक हाइकु समूह से साभार ]

Sunday, 26 August 2012

फसलें झूमीं


फसलें झूमीं
वेदमन्त्र गूंजा है
खेतों में फिर।


-कमलेश भट्ट कमल
[हाइकु-१९८९ से साभार]

फागुन आया


फागुन आया
अँगारे शीश रख
टेसू दहका ।


-शम्भूदयाल सिंह ‘सुधाकर’
[हाइकु-१९८९ से साभार]

फुदक कर


फुदक कर
उड़ा नीड़ से एक
नया जीवन।

-डॉ0 कमल किशोर गोयनका
[हाइकु-१९८९ से साभार]

फूल फूल है


फूल फूल है
मौसम मौसम है
तुम तुम हो।

-डा० भगवतशरण अग्रवाल
[हाइकु-१९८९ से साभार]

Saturday, 24 March 2012

फूल खिलता

फूल खिलता
चटक जाती शिला
है सिलसिला

-डा० मिथिलेश दीक्षित

Sunday, 28 August 2011

फूल चुहुकी

फूल चुहुकी
आई, बैठी डाली
चहंकी, उड़ी ।


-डा० रामनारायण पटेल
( हाइकु दर्पण-फर० 2003 अंक से साभार )

Tuesday, 19 July 2011

फूटी लो फूटी

फूटी लो फूटी
कोंपल के होठों में
दबी जो हँसी।



-डा० सुधा गुप्ता
('चुलबुली रात ने' हाइकु संग्रह से)

Tuesday, 12 July 2011

फूल सी पली

फूल सी पली
ससुराल में बहू
फूल-सी जली ।

- कमलेश भट्ट कमल

( " अमलतास " हाइकु संग्रह से