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Wednesday, 6 May 2020

पूस ने डाँटा

पूस ने डाँटा
काँपा कोहरे बीच
थका सूरज

-ईप्सा यादव
(हा.द. 7)

पत्ता ही गिरा

पत्ता ही गिरा
तट को दें खबर
उठी लहर

-कैलाश कल्ला

Wednesday, 30 May 2018

पेशेवर थीं

पेशेवर थीं
दहाड़ मार रोयीं
आँखें रुदालीं

-पुष्पा मेहरा

Saturday, 17 December 2016

पिता के आँसू

पिता के आँसू
पासिंग परेड में
बेटा टापर

-जानकी वाही

Saturday, 6 June 2015

पलाश वन

पलाश वन
बाँधे लाल मुरैठे
खडी बारात

-योगेन्द्र वर्मा
[फेसबुक हाइकु समूह से]

Friday, 8 May 2015

पाषाण सहे

पाषाण सहे
वक़्त-वक़्त की मार
छिद्रों से कहे

-डॉ० रमा द्विवेदी
[फेसबुक हाइकु समूह से]

Monday, 2 March 2015

पत्ते चीखते

पत्ते चीखते
ठूँठ नहीं रो पाते
कुचले जाते

-विभा श्रीवास्तव
[फेसबुक हाइकु समूह से]

प्रेम की पाती

प्रेम की पाती
पपीहा ही लिखता
वर्षा के गीत

-ओमप्रकाश क्षत्रिय प्रकाश
[फेसबुक हाइकु समूह से]

Wednesday, 10 December 2014

परछाईयाँ

परछाईयाँ
साथ नहीं छोड़तीं
उजाले तक

-प्रियम्बरा

Saturday, 11 January 2014

पेड़ की शाख

पेड़ की शाख
पत्तियों की सेज में
सपने पले

-कुलभूषण व्यास
[हाइकु दर्पण, अंक-10 से]

Saturday, 14 December 2013

पीर पिघली

पीर पिघली
चुपके से छलका
नैनों का जल

-शशि पुरवार
[फेसबुक हाइकु समूह से]

Wednesday, 16 October 2013

पगडंडियाँ

पगडंडियाँ
लगती खरोंच-सी
पहाड़ों पर

भगवत भट्ट
[हाइकु 2009, संकलन से]

Wednesday, 9 January 2013

पीर मन की


पीर मन की
कहने बह चले
निःशब्द आँसू

-हेमन्त रिछारिया
[फेसबुक से साभार]

Sunday, 28 October 2012

पढ़ लिया है



पढ़ लिया है
अंधी भिखारिन ने
पाप मन का

-राजीव गोयल
[ फेसबुक से साभार ]

Saturday, 27 October 2012

पकड़ लेते हैं


पकड़ लेते हैं
एक दूसरे की बाँह
धूप और छाँह


-डा० मिथिलेश दीक्षित

पानी की कमी


पानी की कमी
आँसू टपका रही
पानी की टंकी


-डा० मिथिलेश दीक्षित

Monday, 24 September 2012

पागल हवा


पागल हवा
उजाड़ डाला नीड़
पंछी बेबस


-ईप्सा यादव
(संगम हा.संकलन से साभार)

पानी बरसा


पानी बरसा
खिली रक्त-पुष्प सी
वीर-बहूटी


-रामकृष्ण विकलेश
(हाइकु पत्र- 26, अगस्त 1986 से साभार)

पत्तियों तक


पत्तियों तक
बहुत दबे पाँव
आया सावन


-सुरेश सिंह
(हाइकु पत्र- 22, अंक - अगस्त 1984 से साभार)

Sunday, 26 August 2012

पतझर में


पतझर में
बैठा उघारे तन
सूना जंगल।


-शम्भूदयाल सिंह ‘सुधाकर’
[हाइकु-१९८९ से साभार]