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Wednesday, 6 May 2020

पड़ी जो डाँट

पड़ी जो डाँट
मैं रोया झूठमूठ
माँ सचमुच

-अभिषेक जैन
(फे.बुक हा.स.)

पड़ी फुहार

पड़ी फुहार
आत्मदाह करते
कीट-पतंगे

-उमेश मौर्य

Saturday, 6 June 2015

सिन्दूरी साँझ

सिन्दूरी साँझ
बतियाते रहते
टेसू के गाँछ

-योगेन्द्र वर्मा
[फेसबुक हाइकु समूह से]

वन में भोज

वन में भोज
सज-धज शामिल
टेसू की पाँतें

-अश्विनी कुमार विष्णु
[फेसबुक हाइकु समूह से]

पलाश वन

पलाश वन
बाँधे लाल मुरैठे
खडी बारात

-योगेन्द्र वर्मा
[फेसबुक हाइकु समूह से]

वसंत आया

वसंत आया
पत्तलों की बिटिया
बनी दुल्हन

-उमेश मौर्य
[फेसबुक हाइकु समूह से]

Friday, 8 May 2015

ताप से जूझा

ताप से जूझा
पर्वत का टुकड़ा
दर्द के चिह्न

-डा० जगदीश व्योम
[फेसबुक हाइकु समूह से]

Friday, 13 March 2015

आग की पाग

आग की पाग
बाँधकर पलाश
खेलता फाग

-रामेश्वर काम्बोज हिमांशु
[सरस्वती सुमन हाइकु विशेषांक से साभार]