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Wednesday, 4 March 2015

जलती रेत

जलती रेत
हठयोग में लीन
बूढ़ी खेजड़ी

-विशाल सर्राफ धमोरा
[फेसबुक हाइकु समूह से]

Sunday, 22 June 2014

जोगी कनेर

जोगी कनेर
सुनता है सब की
रहता मौन

-डा॰ जगदीश व्योम

Wednesday, 8 January 2014

जल है कैद

जल है कैद
बाँधों या बोतलों में
आजादी माँगे

-शून्य आकांक्षी
[फेसबुक हाइकु समूह से]

Sunday, 21 July 2013

जेठ की गर्मी


जेठ की गर्मी
गौरैया तके मेह
रेत नहाए

-सुशीला श्योराण शील

Tuesday, 16 April 2013

जल ही गई


जल ही गई
सिगरेट उम्र की
धुआँ भी नहीं

-डा० अनिता कपूर
[ फेसबुक हाइकु समूह से ]

Friday, 18 January 2013

जीने न देते


जीने न देते
दण्डकारण्य में भी
सोने के मृग

-श्रीकृष्ण कुमार त्रिवेदी
[ हाइकु-2009 से साभार ]

Sunday, 26 August 2012

जाते–जाते भी


जाते–जाते भी
देके ही जाता सूर्य
रंगीन शाम।

-सत्यपाल चुघ
[हाइकु-१९८९ से साभार]

Sunday, 3 June 2012

जाने न जाने


जाने न जाने
चिड़ियाँ चुग गईं
खेत अजाने ।

-डा० मीना अग्रवाल


( ' जो सच कहे'  हाइकु संग्रह से )

Saturday, 14 January 2012

जपा कुसुम


जपा कुसुम
खिले, दहके, झरे
तुम न मिले।

-डा० सुधा गुप्ता

(हाइकु पत्र 22,  अगस्त-1984 से साभार)

Sunday, 4 September 2011

जन्म दिवस

जन्म दिवस
एक पृष्ठ खुला
एक मुँद गया ।


-विद्याविन्दु सिंह
( हाइकु पत्र-10, अक्टूवर-1980 से )