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Saturday, 7 August 2021

मरी तो आज

मरी तो आज
जीवित ही कब थी
घर की बेटी

-निवेदिता श्री
(हा.द.समूह)

Friday, 6 August 2021

बेमानी रिश्ते

बेमानी रिश्ते
सम्बंधों की अर्थियाँ 
रोज़ ही ढोते

-सुशीला शील राणा 
(हाइकु लैब)

Wednesday, 4 August 2021

मैं औरत हूँ

मैं औरत हूँ
नेमप्लेट के सिवा
पूरा घर हूँ
-मीनू खरे
(जुगनुओं की वसीयत)

Friday, 28 November 2014

घरों के भेद

घरों के भेद
बतियाती औरतें
बुनती धूप

-योगेन्द्र वर्मा
[फेसबुक हाइकु समूह से]

Sunday, 29 September 2013

हाँ झील हूँ मैं

हाँ झील हूँ मैं
तटों के हैं पहरे
उन्मुक्त नहीं

-आभा खरे
[फेसबुक हाइकु समूह से]

Thursday, 29 March 2012

घूँघट तले

घूँघट तले
स्वतन्त्रता दिवस
देखती बहू।

-ज्योत्सना प्रदीप