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Sunday, 5 April 2015

गिरी तन से

गिरी तन से
पत्तियों की चादर
ठिठुरा पेड़

-कुमार गौरव अजीतेन्दु
[मुक्त उड़ान हाइकु संग्रह से]

Friday, 9 January 2015

गूंगा जंगल

गूंगा जंगल
करने लगा बातें
हवा के संग

-राजीव गोयल
[फेसबुक हाइकु समूह से]

Wednesday, 8 October 2014

गिरी दीवार

गिरी दीवार
बन गए कलह
हाँडी के सिक्के

-अश्विनी कुमार विष्णु
[फेसबुक हाइकु समूह से]

Sunday, 16 June 2013

गरजे मेघ


गरजे मेघ
सहमकर कांपी
कच्ची दीवार

-अभिषेक जैन
[फेसबुक हाइकु समूह से]

Monday, 3 June 2013

गर्मी से डरा


गर्मी से डरा
दुबका चट्टानों में
पहाड़ी सोता

-योगेन्द्र वर्मा
[फेसबुक हाइकु समूह से]

Monday, 24 September 2012

गाँव का हुक्का


गाँव का हुक्का
है कमाल की बात
रिश्ते की गाँठ


-पारस दासोत
(आ चलें गाँव, हा.सं. से साभार)

गाँव ने रचीं


गाँव ने रचीं
खेतों में कविताएँ
लहलहातीं


-पारस दासोत
(आ चलें गाँव, हा.सं. से साभार)

गेहूँ की गंध


गेहूँ की गंध
रच बस गयी है
चैती हवा में


-आशा सिन्हा
(हाइकु पत्र- 25, जून. 1986 से साभार)

Sunday, 28 August 2011

गन्द का भूत


गन्द का भूत
हाथ बढ़ा नोंचता
राही की नाक ।


-आदित्य प्रताप सिंह





Tuesday, 12 July 2011

गरजे मेघ

गरजे मेघ
कानाफूसी करते
ऊँचे शीशम ।

- रजनी भार्गव

( हाइकु दर्पण से साभार )

गठरी फटी

गठरी फटी
बिखरे हैं बताशे
आसमान से ।

- डा० सुधा गुप्ता

( " धूप से गप-शप " हाइकु संग्रह से )