हाइकु कोश *वर्ण*
हाइकु कोश वर्ण क्रमानुसार
हाइकु कोश वर्ण क्रम
हाइकु कोश
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Friday, 19 July 2013
नींद बगीचे
नींद बगीचे
स्वप्नों के खरगोश
मारें छलाँगे
-ज्योतिर्मयी पन्त
[फेसबुक हाइकु समूह से]
नभ ने भरे
नभ ने भरे
बादलों के मशक
जल छलके
-ज्योतिर्मयी पन्त
[फेसबुक हाइकु समूह से]
Friday, 7 June 2013
नयी भोर ने
नयी भोर ने
फड़फड़ाये पंख
जागी आशाएँ
-त्रिलोक सिंह ठकुरेला
[फेसबुक हाइकु समूह से]
Saturday, 12 January 2013
नन्हें वल्बों में
नन्हें वल्बों में
गुम हो गया दिया
तैल-गंध भी
-डा० जगदीश व्योम
Monday, 24 September 2012
नाक पे बैठी
नाक पे बैठी
पानी चुआती रही
शीत हठीली
-राधेश्याम
(हाइकु पत्र- 23, जन. 1986 से साभार)
Sunday, 26 August 2012
नदी हँसी थी
नदी हँसी थी
घरौंदा बनाने पे
मेरे तुम्हारे।
-डा० भगवतशरण अग्रवाल
[हाइकु-१९८९ से साभार]
Saturday, 14 January 2012
नभ-सर में
नभ-सर में
करते जल क्रीड़ा
मेघ-मतंग।
-डा० वेदज्ञ आर्य
(हाइकु पत्र 22, अगस्त-1984 से साभार)
Sunday, 18 September 2011
नदी उदास
नदी उदास
घाट
-
घाट बाँटे हैं
ठेकेदारों ने ।
-अखिलेश शर्मा
(
हाइकु पत्र
- 19,
अक्टूबर
1982 )
Sunday, 4 September 2011
नदिया चली
नदिया चली
मरु-
आँगन फँसी
भोली नादान ।
-उर्मिला कौल
( हाइकु पत्र
-6,
मई
-1979
से
)
Sunday, 28 August 2011
नींद के मारे
नींद के मारे
ओस बन लुढ़के
आकाश
-तारे
-
शम्भूशरण द्विवेदी बंधु
Tuesday, 12 July 2011
नीला कालीन
नीला कालीन
चर गए शशक
दूब के धोखे ।
- डा० सुधा गुप्ता
( " चुलबुली रात ने " हाइकु संग्रह से )
नदी कुंवारी
नदी कुंवारी
डूब मरी बेचारी
पांव थे भारी।
- गोविन्द नारायण मिश्र
( साभार हाइकु 1989 )
नींद के खेत
नींद के खेत
चर गए फसल
दुःख चीतल ।
- डा० सुधा गुप्ता
( " धूप से गप-शप " हाइकु संग्रह से )
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