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Wednesday, 6 May 2020

बुरांस खिले

बुरांस खिले
घुघूती की सीटी से
गूँजा पहाड़
-दिनेश चन्द्र पाण्डेय

Thursday, 26 February 2015

बैठी बेख़ौफ़

बैठी बेख़ौफ़
शाखाओं की गोद में
नन्हीं कोपल

-राजीव गोयल
[फेसबुक हाइकु समूह से]

Thursday, 15 January 2015

बातूनी पेड़

बातूनी पेड़
बिछड़ी जो पत्तियाँ
हो गया चुप

-राजीव गोयल
[फेसबुक हाइकु समूह से]

Saturday, 6 December 2014

बन जाते हैं

बन जाते हैं
बया की कलादीर्घा
कँटीले वृक्ष

-अश्विनी कुमार विष्णु
[हाइकु समूह से] 

Wednesday, 29 October 2014

बाँचती रहीं

बाँचती रहीं
कोने में मकड़ियाँ
वेद-पुराण

-उमेश मौर्य
[फेसबुक हाइकु समूह से]

Wednesday, 30 July 2014

बरसा पानी

बरसा पानी
श्वेत-श्याम भूधर
हो गये धानी

-शम्भूशरण द्विवेदी बंधु

Saturday, 14 December 2013

बूढ़ी हड्डियाँ

बूढ़ी हड्डियाँ
सहलाने आ गयी 
जाड़े की धूप

-सुनीता अग्रवाल
[फेसबुक हाइकु समूह से]

Wednesday, 16 October 2013

बहका रही

बहका रही
छायादार पेड़ को
आवारा धूप

-ओमप्रकाश चतुर्वेदी पराग
[हाइकु 2009, संकलन से]

Friday, 19 July 2013

बूंदों के बूटे


बूंदों के बूटे
धरा की ओढ़नी पे
नभ ने काढ़े


-डा० सरस्वती माथुर
[फेसबुक हाइकु समूह से]

Friday, 12 July 2013

बरसा मेह


बरसा मेह
टीन का खपरैल
चाय का ढाबा

-रजनी भार्गव
[ फेसबुक हाइकु समूह से ]

Sunday, 7 July 2013

बहा ले गई



बहा ले गई
हँसमुख झोपड़ी
घायल नदी

-योगेन्द्र वर्मा
[फेसबुक हाइकु समूह से]

Monday, 17 June 2013

बरसे घन


बरसे घन
नदी ने तोड़ डाले
तट बंधन

-नवल किशोर नवल
[फेसबुक हाइकु समूह से]

Thursday, 13 June 2013

बेटी मेघों की


बेटी मेघों की
चुरा ले गई चन्दा
अकेला जो था

-डा० शैल रस्तोगी
[मेंहदी लिखे खत]

Saturday, 12 January 2013

बगुले गिनें


बगुले गिनें
लहरें समुद्र की
बने मुनीम

-ललित मावर
[ 'आकाश गंगा' से साभार ]

Thursday, 20 December 2012

बीनते रहे


बीनते रहे
सुखों की कतरन
गुजरी उम्र

-योगेन्द्र वर्मा
[फेसबुक से साभार]

Wednesday, 10 October 2012

बाँसों को लड़ा



बाँसों को लड़ा
हवा, हो गई हवा
झुलसा वन

-आदित्य प्रताप सिंह

Monday, 24 September 2012

बच्चा हँसा


बच्चा हँसा
कायनात हँस दी
सूरज उगा


-सरला अग्रवाल
(हाइकु दर्पण से साभार)

Sunday, 26 August 2012

बुलाओ मुझे


बुलाओ मुझे
पुआल के बिछौने
सोना चाहूँ मैं।


-डा० विद्या बिन्दु सिंह
[हाइकु-१९८९ से साभार]

बातें करतीं


बातें करतीं
हरियाले लान पे
पड़ी कुर्सियाँ।

-डा० भगवतशरण अग्रवाल
[हाइकु-१९८९ से साभार]

बादल अब


बादल अब  
गरजें न बरसें
रंगोली पूरें।

-झीणा भाई देसाई ‘स्नेह रश्मि’
[हाइकु-१९८९ से साभार]