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Sunday, 20 June 2021

रोग खरीदे

रोग खरीदे
बेचकर हमने
जल-जंगल

-डा० विश्व दीपक बमोला

रोके खड़ी हैं

रोके खड़ी हैं
मेरे हिस्से की धूप
अट्टालिकाएँ
-सुनीता अग्रवाल नेह

Wednesday, 6 May 2020

रेत के बीच

रेत के बीच
काँटों से बिंधे खड़े
नट कैक्टस

-पुष्पा मेहरा

Friday, 15 June 2018

रिश्ते हमारे

रिश्ते हमारे
उधड़ने लगते
माँ सिल देती

-नीलू गुप्ता

Saturday, 17 December 2016

रँग रही हैं

रँग रही हैं
बादलों की कूँचियाँ
सपने मेरे

-मिथिलेश बड़गेनियाँ

Friday, 8 May 2015

रूप निहारे

रूप निहारे
हजारों शैल-नेत्र
रेवा मैया का

-सुरेश जादव
[फेसबुक हाइकु समूह से]

रहे अमिट

रहे अमिट
सदियों की दास्तान
पत्थर कहें

डा० रमा द्विवेदी
[फेसबुक हाइकु समूह से]

Monday, 2 February 2015

रेतीला टीला

रेतीला टीला
घूमे हवा के संग
ख़ानाबदोश

- विशाल सर्राफ धमोरा,
[फेसबुक हाइकु समूह से]

Thursday, 24 April 2014

रानी सरदी

रानी सरदी
बाँट रही दुशाले
धूप से बुने

-डा० उर्मिला अग्रवाल
[भोर आसपास है, हाइकु संग्रह से]

Wednesday, 22 January 2014

रुई की मिल

रुई की मिल
खुल गई नभ में
बौराई ठण्ड

-शोभा रस्तोगी
[ ईमेल से प्राप्त ]

Monday, 15 July 2013

रोक लेते हैं


रोक लेते हैं
धूप मेरे हिस्से की
ऊँचे मकान

-राजीव गोयल
[फेसबुक से साभार]


Sunday, 16 June 2013

राह दिखाने


राह दिखाने
आज भी आ जाते हैं
ख्वाबों में पिता

-शिवजी श्रीवास्तव

Saturday, 9 February 2013

रोता छोड़ के


रोता छोड़ के
चली गई बारिश
घने पेड़ों को

-ओमप्रकाश यती
( फेसबुक से साभार )

Saturday, 27 October 2012

रेत के घर


रेत के घर
सागर की लहरें
कब ठहरे हैं


-डा० मिथिलेश दीक्षित

Sunday, 26 August 2012

रचता नीड़


रचता नीड़
ले आता बहू नई
रसिया बया।


-सुरेश चन्द्र वात्स्यायन
[हाइकु-१९८९ से साभार]

Tuesday, 12 June 2012

रुई के फाहे


रुई के फाहे
बादलों पर छाये
वृक्ष नहाये


-अर्बुदा ओहरी
[ हाइकु 2009 से साभार ]

Wednesday, 23 May 2012

रात की काई


रात की काई
स्मृतियों का सूरज
फिर फिसला ।

-स्वाति भालोटिया

Sunday, 28 August 2011

रोए पहाड़


रोए पहाड़
आँसू सहस्रधार
बहे झरना ।


-मनोज सोनकर
(खुर्दबीन हाइकु संग्रह से)

Tuesday, 12 July 2011

रच अल्पना


रच अल्पना
चली बक–पंक्तियाँ
नीलाम्बर में।



- डॉ0 वेदज्ञ आर्य

( साभार हाइकु 1989 )