वृत्त में क़ैद
गोल गोल घूमती
धुरी सी माँ !
-आराधना झा श्रीवास्तव
बेमानी रिश्ते
सम्बंधों की अर्थियाँ
रोज़ ही ढोते
-सुशीला शील राणा
(हाइकु लैब)
फूटा गुब्बारा
हवा में मिल गईं
हवा की साँसें
-उमेश मौर्य
फिर जियेगी
बेटी के ही बहाने
माँ बचपन
-अलंकार आच्छा
(हाइकु लैब)
अग्नि कुंड पे
बारिश का हमला
जूझती ज्वाला
-अरुन शर्मा
हया ही तो है
सिमटी छुईमुई
छूते ही देह !
-आभा खरे
बया का स्वर
प्यानों में ढूँढ़ रहा
बूढ़ा वादक
-उमेश मौर्य
(हा.द.समूह)